कैसे कमायें लाखों….हिन्दी सेवा से

जैसे बरसात में कुकुरमुत्ते और चुनाव में टिकटार्थी अपना सर उठाये प्रकट हो जाते हैं वैसे ही हिन्दी दिवस और हिन्दी पखवाड़े पर बहुत से हिन्दी के वरद पुत्र धन की फसल काटने को प्रकट हो जाते हैं.कुछ जुनियर टाइप मिनि पुत्र केवल 20-30 हिन्दी की प्रतियोगिताओं मे जज बनकर हजार वजार के लिफाफे जुगाड़ते हैं पर कुछ पर्मानेंट वरद पुत्र ‘पांचो उंगलिया घी में और सर कड़ाई में’ वाली स्थिति को प्राप्त कर परम सुख का अनुभव करते हैं. इधर ऎसे ही एक मिनि पुत्र ने हिन्दी में स्मार्ट निवेश कर लाखों की फसल काटने की इच्छा जाहिर की. फिर क्या था खाकसार जुट गये रिसर्च में. रिसर्च से जो बहुमूल्य नुस्खे मिले वो जनता की बेहद मांग पर एक्स्लूसिवली यहां पेश किये जा रहे हैं. ये सारे नुस्खे ‘सेवन स्टेप्स फॉर चर्निंग मनी थ्रू हिन्दी सेवा’ नामक शोध पत्र में जारी किये गये हैं. 

1. मनी फोकस : आपको सबसे पहले अपना फोकस ठीक करना होगा.आपको ये निर्धारित करना होगा कि आप क्या करना चाहते हैं साहित्यिक उन्नति या आर्थिक उन्नति.इन दोनों उन्नतियों में वैसा ही संबंध है जैसा कि भारत की उन्नति और विदर्भ के किसान की उन्नति में. नेता और ईमानदारी में भी ऎसे ही संबंध आमतौर पर पाये जाते हैं. यदि आप लक्ष्मी चाहते हैं तो आपको सरस्वती को टाटा बाय बाय बोलना ही पड़ेगा.सैट योर फोकस ऑंनली ऑन मनी हनी.   

2.अंग्रेजी दक्षता: यदि आपको हिन्दी के खेत में  धन की फसल काटनी हो तो आपके पास अंग्रेजी का हंसिया होना आवश्यक है.यानि आपकी हिन्दी भले ही बहुत अच्छी ना हो लेकिन आपकी अंग्रेजी अच्छी होनी चाहिये.इस हेतु पूरे प्रयास करें यदि ना हो पाये तो एक खूबसूरत आवाज की मलिका अंग्रेजी में दक्ष सैक्रेटरी को रख लीजिये. जो आपके अपॉइटमेंट ले के डेट्स मैनेज कर सके.डेट मैनेजमेंट एक कला है.इसमें अगले को डेट तब तक नहीं दी जाती जब तक वो मनमाफिक रोकड़े का वादा ना कर दे साथ ही यह भी ध्यान रखा जाता है कि कहीं वो दूसरे हिन्दी सेवी के द्वार ना खटखटाने लगे.   

3. चेला चमचा चमत्कार : चमचों और चेलों के चमत्कार से यदि आप परिचित नहीं तो आप सच्चे सेवक नहीं हो सकते. राजनीति और साहित्य के सभी पुराने खिलाड़ी इन चमत्कारी चिरकुटों से परिचित होते हैं. आपके चेले चमचे ही आपकी असल पूंजी हैं.ये चमत्कारी ही आपके बारे में ऎसी अनुकूल हवा बनाते हैं कि आपकी साहित्य की पतंग, धन वर्षा करती हुई, नित नयी उंचाइयाँ तय करती है.तो जितना हो सके चेले और चमचे बनायें.   

4.मार्केटिंग मंत्रा:एक सफल प्रोड्क्ट के पीछे अतिसफल मार्केटिंग होती है.अपनी मार्केटिंग करें तो अपने नाम और काम के आगे प्रभावशाली विशेषणों का धुंआधार प्रयोग करें जैसे “एक शाम चतुर चक्रम के नाम.हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि के साथ गुदगुदाती,चुभती,हँसाती और ठहाकों भरी कविताओं का वायदा शुद्ध हास्य कवि सम्मेलन.” विशेषण देखिये गुदगुदाती,चुभती,हँसाती जैसे कविता ना हुई गुलाब का फूल हो गया… और ‘शुद्ध’ वैसे ही जैसे वनस्पति घी से मिठाइयां बनाने वाला हलवाई लिखता है शुद्ध देसी घी से बनी.

5. अनिवासी ऎडवांटेज : यदि आप एन आर आई हैं तो समझिये कि आपने आधी बाजी जीत ली.इस देश में आदिवासी और अनिवासी दोनों की बहुत इज्जत है.एक की वोट के लिये दूसरे की नोट के लिये.यदि आप देश के बाहर रहते हैं और हिन्दी साहित्य के नाम पर कूड़ा साहित्य भी पटक देते हैं तो वो भी कालजयी हो अनेक किताबों में परिलक्षित होता है. 

6. एक्स्पोर्ट ओरियेंटेसन: अपने देश में जिस चीज की कदर नहीं उसकी कदर अमरीका,ब्रिटेन में है.यहां के फ्लॉप संत अमरीका में योगी बन जाते हैं यहां की फ्लॉप फिल्में अमरीका,ब्रिटेन में हिट हो जाती है यहां के बॉलीवुडी हीरी भी जब फ्लॉप होने लगते हैं तो शो करने वहां पहुंच जाते है और हिट हो जाते हैं.डॉक्टर,इंजीनियर और आई टी प्रोफेशनल्स का इतिहास तो खैर पुराना है ही. तो आप भी लिखिये अमरीका के लिये ब्रिटेन के लिये.फिर देखिये कैसे बरसते हैं डॉलर और पाउंड.    

7. ए एम सी नहीं पी एम सी:हिन्दी के जुनियर पुत्र हिन्दी सेवा को ऎनुअल मैंटीनैंस कॉंट्रैक्ट की तरह देखते हैं बस एक दिन पैसा लिया और साल भर का जुगाड़ पक्का.अब फिर प्रतीक्षा अगले साल की.ये पिछ्ड़ा तरीका माना जाता है. नयी तकनीक के अनुसार धुरंधर वरद पुत्र हिन्दी सेवा को पर्मानैट मनी चर्नर मानते हैं यानि ऎसी कामधेनु गाय जो हमेशा दूही जा सकती है.  

ये सातों नुस्खे साहित्य के सब्जी बजार में आपकी दुकान अच्छे से चला सकते हैं.आदरणीय शरद जोशी जी ने कहा था ‘साहित्य के सब्जी बजार में तीन तरह के आलू पाये जाते हैं – श्रद्धालू,कृपालू और ईर्ष्यालू “ ये आप को निर्धारित करना है कि आप कौन सा आलू बेचना चाहते हैं. हमारी इन नुस्खों को अपनाये तो आप भी बन सकते हैं एक सफल ‘चतुर चक्रम’

चिट्ठाजगत चिप्पीयाँ: हास्य व्यंग्य, काकेश, हिन्दी सेवा

By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

7 comments

  1. मुझे तो चेला, चमचा और चमत्कार…और एक्सपोर्ट ओरिएंटेशन का नुस्खा अपने लिए काफी मुफीद लगता है।

  2. भई बढ़िया है। चालू चेलों पर कायदे के वस्ताद कृपालू होते हैं। चालू कैसे बना जाये, कुछ शोध इस पर भी रहे।

  3. वाह जी, ऐसे-ऐसे धांसू फंडे बताते रहेंगे तो हिन्दी सेवा की फसल तो लहलहा ही उठेगी।

  4. मेरे पास तो आपकी सेवन स्‍टेप्‍स में से एक भी नहीं है । कोई, एक-आध स्‍टेप ऐसी भी बताइए जिससे इस बैरागी का भला हो जाए ।

  5. 5 नम्बर वाला नुस्खा ही फलित दिख रहा है, उसी पर और हाथ अजमाता हूँ, साहेब. आपने आँखें खोल दी.

    मजेदार टिप्स!!! 🙂

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